सांसद किरोड़ी के निशाने पर अब RPSC के सदस्य शिव सिंह राठौड़

आरपीएससी बनी राजस्थान कांग्रेस सर्विस कमीशन  आरपीएससी में भ्रष्टाचार (आरएएस 2018) 1. आरएएस 2018 मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका ...

आरपीएससी बनी राजस्थान कांग्रेस सर्विस कमीशन 

आरपीएससी में भ्रष्टाचार (आरएएस 2018)

1. आरएएस 2018 मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जांचने में भ्रष्टाचार—

आरपीएससी चैयरमेन दीपक उत्प्रेती जिनकी नियुक्ति दिनांक 23.07.2018 को हुई एवं इनकी सेवानिवृत्ति दिनांक 14.10.2020 को हुई। आरएएस 2018 भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली हुई जिसमें आरपीएससी चैयरमेन की भी भूमिका रही। इनके साथ आरपीएससी सदस्य श्री शिवसिंह राठौड़ मुख्य किरदार में थे। आरएएस 2018 की मुख्य परीक्षा सम्पन्न होने के बाद एमडीएस विश्वविद्यालय अजमेर के बृहस्पति भवन के सभागार और विक्रमादित्य भवन में ऑन स्क्रीन जांचने का काम शुरू किया गया। 

आरएएस 2018 की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के समय विश्विद्यालय के कुलपति प्रो. आर.पी. सिंह थे। ध्यान देने की बात यह है कि एसीबी ने विश्वविद्यालय में अनियमितताओं को लेकर वीसी आर.पी. सिंह से पुछताछ की तथा इन्हें परीक्षा केन्द्र बनाने के नाम, शिक्षक भर्ती, अशैक्षणिक पदों पर भर्ती आदि मामलों को लेकर दिनांक 09 सितम्बर 2020 को एसीबी ने इन्हें गिरफ्तार किया। इन्ही कुलपति ने आरएएस 2018 की कॉपियों को जांचने की जिम्मेदारी प्रो. शिवदयाल सिंह शेखावत को दी जो कि आरपीएससी सदस्य शिवसिंह राठौड़ के चहेते थे। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि आरपीएससी चैयरमेन श्री दीपक उत्प्रेती ने आरपीएससी की ओर से कॉपियों की जांचने का समन्वयक आरपीएससी सदस्य श्री शिवसिंह राठौड़ को बनाया। उस समय अजमेर के समाचार पत्रों में आरएएस 2018 की कॉपियों को जांचने में भ्रष्टाचार को लेकर खबरे छपी परन्तु न तो विश्वविद्यालय प्रशासन और न ही आरपीएससी और न ही सरकार के द्वारा कोई कदम उठाया गया। 

प्रो. शिवदयाल पर भ्रष्टाचार के मामले पहले से ही लगे हुए व उनकी नियुक्ति पर भी कई सारे प्रशनचिन्ह है जैसे की एम डी एस यूनिवर्सिटी के जन्संख्या अध्ययन केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियमानुसार नियुक्त हुए थे जिसके बाद में यह इसी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नत हुए। आश्चर्य की बात यह है की यू जी सी के नियमों को ताक पर रखते हुए प्रोफेसर के रूप में दूसरे विभाग (अर्थशास्त्र) में पदोन्नत कर दिए गए। वर्तमान में यह अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष है। बावजूद इसके आरएएस 2018 की कॉपियां जांचने जैसे गोपनीय कार्य में इनको कॉर्डिनेटर लगाना आरपीएससी, विश्वविद्यालय कुलपति, सरकार की मिलिभगत से हुए भ्रष्टाचार को उजागर करता है। ध्यान देने योग्य बात है की ये श्री गोविन्द सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र के गाँव खुड़ी(khuri) रसीदपुरा के निवासी है।

शिव सिंह राठौड़ पर शुरु से ही आरएएस अभ्यर्थियों द्वारा आरोप लगाए जा रहे थे जिस तरह से ऑन स्क्रीन कॉपियां जांची गई उन कॉपियों के अंको में गोपनीय शाखा के कर्मचारियों ने माना है कि अंकों में फेरबदल किया जा रहा है। जब आरएएस 2018 का अंतिम परिणाम आया तो उसमें देखने को मिला कि सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के परिवार के सदस्यों के उत्तर पुस्तिकाओं में नंबर अच्छे थे। ​जिन उत्तरों में पांच—छ: गोले उत्तर पुस्तिका में लगा रखे थे यानि उन्हें अशुद्ध दर्शाया गया था फिर भी उस उत्तर में 70 से 80 प्रतिशत अंक दिए गए। अगर कोई प्रोफेसर जांचने के दौरान अशुद्धियों को गोले से दर्शाता है उसके बावजूद उस उत्तर पुस्तिका में 70 से 80 प्रतिशत अंक दिए गए यानि प्रोफेसर के कॉपी जांचने के बाद अंकों में फेरबदल किया गया।  

2. आरएएस 2018 की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में हुए भ्रष्टाचार का एक बड़ा खुलासा – 

शिवा शर्मा नाम के अभ्यर्थी के प्रश्न पत्र एक की उत्तर पुस्तिका में करीब तीस अंकों के प्रश्नों के उत्तर में परीक्षक NA (Not Attempt) लिखा गया है, अर्थात अभियर्थी ने परीक्षा के समय इन प्रश्नों के उत्तर दिए ही नहीं थे और परीक्षक ने उत्तरपुस्तिका जांचने के दौरान इनपे NA दर्ज  किया और प्रश्न पुस्तिका की मुख्य अंक शीट में परीक्षक द्वारा उन प्रश्नों में शुन्य अंक दिए। लेकिन RTI से अभ्यर्थी द्वारा मंगवाई गयी उत्तरपुस्तिका की सत्यापित प्रतिलिपि में ये सभी NA वाले प्रश्न के उत्तर Attempted थे। इससे साबित होता है की आरपीएससी में इस अभ्यर्थी की कॉपी में बाद में NA वाले प्रश्नों के उत्तर अभ्यर्थी द्वारा भराये गए। इस अभ्यर्थी ने माननीय उच्च न्यायलय की शरण में जाकर NA वाले प्रश्नों को जांचने का आदेश भी ले लिया। ऐसे जाने कितने ही उद्धारण और है जो ये साबित करते है की 40% अभ्यर्थी इसी प्रकार के घोटालों का सहारा लेकर इस 2018 परीक्षा में आरएएस अफसर बने एवं। 

3. शिवा शर्मा वाले घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ की भूमिका — 

शिवा शर्मा वाले मामले में सीधी ही शिव सिंह राठौड़ की भूमिका संदिगध दिखाई पड़ती है। इस अभ्यर्थी के चतुर्थ प्रश्न पत्र में आशचर्यचकित करने वाले 145 अंक प्राप्त किये जबकि इसकी मूल उत्तरपुस्तिका देखने से पता लगता है की अध्यक्ष महोदय ने इन्हे उपकृत किया गया है। परंतु ये एसडीएम नहीं बन पाए और यहाँ से आरपीएससी अध्यक्ष का दूसरा खेल शुरू होता है। सत्तादल के बड़े नेताओं के काम करने के रूप में शिव सिंह राठौड़ को इनाम के रूप कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया। कार्यवाहक अध्यक्ष बनने के बाद शिव सिंह राठौड़ ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करते हुए शिवा शर्मा की NA वाली कॉपी में अभ्यर्थी द्वारा प्रश्नों के उत्तर भरवाकर कॉपियां जमा करवा ली। ध्यान देने वाली बात है की 13 जुलाई 2021 को आरएएस 2018 का अंतिम परिणाम आरपीएससी द्वारा जारी किया गया जिसके कुछ दिन बाद नियमानुसार अभ्यर्थी आरटीआई द्वारा अपनी कॉपियां आरपीएससी से मंगवा सकते है। लेकिन पहली बार ऐसा देखने को मिला के प्रक्रिया ख़तम होने के छः महीने बाद आरटीआई द्वारा अभ्यर्थी अपनी पुस्तिका मंगवा पाए। ऐसा आरपीएससी के इतिहास में कभी नहीं हुआ। इससे यह साबित होता है की शिव सिंह राठौड़ द्वारा आरपीएससी अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करने के कुछ दिन बाद ही आरटीआई द्वारा कॉपी माँगने का लिंक जारी कर दिया गया। अर्थात ऐसे कई अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं के अंकों में वृद्धि एवं खाली प्रश्नों में उत्तर भरवाए गए। 

4. सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं के रिश्तेदार का चयन—

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व शिक्षा मंत्री श्री गोविन्द सिंह डोटासरा के निजी रिश्तेदारों को लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में अनुचित लाभ पंहुचाया गया।
पीसीसी अध्यक्ष के पुत्र अविनाश के साले गौरव पुनिया एवं साली प्रभा पुनिया दोनों सगे भाई बहिनों के साक्षात्कार में एक समान 80 प्रतिशत अंक दिए गए। लिखित मुख्य परीक्षा के चतुर्थ प्रश्न पत्र में भी दोनों को एक ही समान अंक 99.50 प्राप्त हुए। यह दुर्भल संयोग आरपीएससी की संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। गोविन्द सिंह डोटासरा के रिश्तेदार परिवार के छ: अभ्यर्थियों का आरएएस 2018 परीक्षा में अंतिम चयन हुआ। 

1. प्रभा पुनिया, 
2. गौरव पुनिया (डोटासरा के पुत्र अविनाश के साली एवं साला है) 
3. कुल ज्योति पूनिया
4. सुमन पुनिया
5. मोनिका पुनिया (कुल ज्योति पूनिया की सुमन एवं मोनिका पुनिया भाभी है) 
6. निकिता पुनिया (कुल ज्योति की बहन लगती है) इन सभी को न कि साक्षात्कार बल्कि मुख्य लिखित में भी अनुचित लाभ पंहुचाया गया है। 

गोविन्द सिंह डोटासरा ने अपने इन रिश्तेदारों को साक्षात्कार में अंक दिलवाने के लिए आरपीएससी सदस्य श्री शिवसिंह राठौड़ को अच्छे अंक देने के लिए कहा इस पर शिव सिंह राठौड़ ने कहा कि आप आरपीएससी अध्यक्ष भूपेन्द्र यादव से कहकर मेरा बोर्ड बनाने के लिए कहें। इसके बाद डोटासरा ने भूपेन्द्र यादव को कहा परन्तु यादव द्वारा इस काम के लिए मना कर दिया गया। डोटासरा ने फिर शिव सिंह राठौड़ से बात की और भूपेन्द्र यादव की मना करने की बात बताई। इस पर शिव सिंह ने कहा कि आपने इन्हें छुट्टी पर जाने के लिए कहें परन्तु भूपेन्द्र यादव इस बात पर भी सहमत नहीं हुए। इसके बाद डोटासरा ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत तक ये बात पंहुचाई फिर मुख्यमंत्री ने भूपेन्द्र यादव को छुट्टी पर जाने के लिए कहा। इसके बाद भूपेन्द्र यादव छुट्टी पर चले गए और शिव सिंह राठौड़ वरिष्ठ सदस्य होने के नाते साक्षात्कार के समय अध्यक्ष के रूप में रहे और डोटासरा की जो इच्छा थी उसे पूरा किया।

इसी प्रकार से एक ही परिवार के निम्न सदस्य जो कि घरड़ाना गांव के है। 

1. मुक्ता राव 
2. पंकज राव 
3. मनीषा राव 
4. निकिता राव 
5. मुकेश धनकड़ (मुक्ताराव के छोटी बहन का पति) आदि को मुख्य लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में अनुचित लाभ दिया गया। 

सत्ताधारी दल के नेताओं ने अपने रसूख का प्रयोग करते हुए रिश्तेदारों एवं संबंधियों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में अनुचित लाभ दिलवाया। 
आरएएस साक्षात्कार से जुड़े भ्रष्टाचार प्रकरण में एसीबी ने ट्रेप की कार्रवाई की जिसमें 19.95 लाख रुपये के साथ किशनाराम, ठाकराराम एवं जोगाराम को गिरफ्तार किया गया। जो अभ्यर्थी हरिश सहारण (रेंक 166) को अधिक अंक दिलाने हेतु रिश्वत के रूप में दिए गए पैसे वापस लेकर आ रहे थे बावजूद इस पर न तो रिश्वत देने वाले पर कार्रवाई हुई और न ही संबंधित सदस्य का नाम उजागर हुआ। 

5. भ्रष्टाचार को साबित करने वाले निम्न बिन्दु—

1. आरएएस 2018 की अंतिम सूची में शीर्ष तीन सौ रेंक वाले अभ्यर्थियों में से 202 का चयन जयपुर के कुछ चुनिंदा केन्द्रों से हुआ। 

2. आरपीएससी द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का परीक्षण गोपनीय रूप में कराया जाता है परन्तु पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं का परीक्षण के स्थान की सूचना दैनिक समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हो गई इससे ना केवल गोपनीयता भंग हुई ​बल्कि उत्तर पुस्तिकाओं के परीक्षण में धांधली को भी निमंत्रण दिया गया। 

3. आरएएस मुख्य परीक्षा का परिणाम एक वर्ष बाद आया। एक वर्ष में परिणाम जारी करना आरपीएससी में धांधली का स्वयं सिद्ध साक्ष्य है। 

4. इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि लगभग 70 हजार उत्तर पुस्तिकाओं को मात्र 18 दिन में (14 फरवरी से 6 मार्च 2020 तक) जांचा गया जो असंभव सा है। इस प्रकार सालभर निष्क्रिय रहना और अंत में 18 दिन में परिणाम तैयार करना परीक्षण की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लगता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूर्व में जिस फर्म को आरएएस की मुख्य परीक्षा ऑन स्क्रीन जांचने की व्यवस्था में टेण्डर दिया गया था उसे रद्द करके नई फर्म को कॉपी जांचने का कार्य कुछ दिन पहले ही दिया गया। इस नई फर्म को लाने में बड़े नेता एवं शिव सिंह राठौड़ का हाथ है।  

5. आरपीएससी द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के परीक्षण में कोई मानक मूल्यांकन पद्धति नहीं अपनाई जाती और ना ही कोई मॉडल उत्तर कुंजी बनाई जाती जिसके अभाव में परीक्षक मनमाने अंक देते है। मानक मुल्यांकन पद्धति के अभाव से परीक्षण प्रक्रिया में एकरूपता व समानता नहीं होने के फलस्वरूप अभ्यर्थियों के प्राप्त अंकों में भारी अंतर रहता है।

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राजस्थान की सबसे बड़ी परीक्षा आरएएस 2021 में रीट भर्ती से बड़ा घोटाला जिसके सूत्रधार कार्यवाहक अध्यक्ष श्री शिव सिंह राठौड़ है—

श्री भूपेन्द्र यादव दिनांक 14.10.2020 से 1.12.2021 तक आरपीएससी अध्यक्ष रहे इनके कार्यकाल में ही आरएएस 2021 भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति जारी हुई और आरएएस प्रारम्भिक परीक्षा भी इनके कार्यकाल में दिनांक 27.10.2021 को संपन्न, जिसका परिणाम दिनांक 19.11.2021 को जारी हो गया। 

आरएएस मुख्य परीक्षा 2021 की घोषणा भी दिनांक 24.11.2021 को इनके कार्यकाल में हुई, जिसकी परीक्षा दिनांक 25, 26 फरवरी 2021 को कराया जाना निर्धारित किया। गौर करने वाली बात यह है कि आरएएस मुख्य परीक्षा 2021 का सिलेबस नियमानुसार विज्ञप्ति जारी होने के समय ही डाला जाना चाहिए था, किन्तु प्री परीक्षा के परिणाम के बाद दिनांक 23.11.2021 को डाला गया। 

शिव सिंह राठौड़ आरपीएससी चेयरमैन बनने का सपना आकाओं की कृपा से संपन्न हुआ। 
आरपीएससी अध्यक्ष भूपेन्द्र यादव के सेवानिवृत होने के बाद श्री शिवसिंह राठौड़ ने दिनांक 2.12.2021 से 29.1.2022 तक कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इससे पूर्व श्री शिव सिंह राठौड़ का कार्यकाल विवादों (आरएएस 2018, एसआई 2020, एसीएफ 2018, एईएन भर्ती) से घिरा होने के बावजूद इन्हें सरकार की अनुशंषा पर कार्यवाहक अघ्यक्ष बनाया गया। आरएएस 2021 की भर्ती महत्वपूर्ण दौर में चल रही थी, जिसमें प्रश्न पत्र तैयार करने की एक महत्वपूर्ण एवं गोपनीय जिम्मेदारी थी इसके बावजूद भी सरकार ने श्री शिवसिंह राठौड़ जैसे विवादित व्यक्ति को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने का जोखिम क्यों लिया। 

आरएएस भर्ती 2018 में बड़े नेताओं के बच्चों का चयन कराने का इनाम इन्हें अघ्यक्ष के रूप में मिला। इनकों अध्यक्ष बनाने में आरटीडीसी चैयरमेन श्री धर्मेन्द्र राठौड़ व गोविन्द सिंह डोटासरा का योगदान रहा। आरएएस भर्ती 2021 की मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्रों की जिम्मेदारी स्वत: ही श्री शिव सिंह राठौड़ पर आ गई थी।

अभ्यर्थियों का राजस्थान विश्वविद्यालय में विरोध एवं माननीय हाईकोर्ट की विवादित प्रश्नों को लेकर सख्त टिप्पणी—

आरएएस मुख्य परीक्षा 2021 का प्री परीक्षा के परिणाम के बाद सिलेबस जारी किया गया जो कि नियमानुसार गलत है। इसका विरोध आरएएस प्री परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों ने राजस्थान विश्वविद्यालय के द्वार पर 12 फरवरी 2022 को धरना शुरू किया उनकी मांग थी कि सिलेबस में बहुत ज्यादा परिवर्तन के बावजूद मुख्य परीक्षा के लिए उन्हें उचित समय नहीं दिया गया। 

उनकी यह मांग जायज थी और सत्ताधारी एवं विपक्षी दल के विधायकों व सांसदों ने भी इनका समर्थन किया था। दिनांक 19.02.2022 को मैं और विधायक राजेन्द्र राठौड़ अभ्यर्थियों की जायज मांग के समर्थन में धरना स्थल पर गए। मैनें इस मामले को लेकर कहा था कि मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम 35 प्रतिशत बढ़ाया गया है, जिसके कारण अभ्यर्थियों को समय कम मिला है। 

मैने उस समय कहा था कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं द्वारा अपनों को लाभ पंहुचाने के लिए कोई खेला तो नहीं खेला जा रहा। परन्तु मुख्यमंत्री जी इस समय आरपीएससी अध्यक्ष के रूप में दिखाई दे रहे थे। दूसरी ओर माननीय हाईकोर्ट आरएएस प्रा. परीक्षा 2021 के विवादित प्रश्नों को लेकर सख्त था। 

आरपीएससी ने 150 प्रश्नों में से 06 प्रश्न तो पहले ही डिलिट कर दिए इसके बाद भी 14 प्रश्नों पर अभ्यर्थियों ने माननीय हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिसमें सिंगल बैंच ने दिनांक 22.2.2022 को प्री प्रा. परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परिणाम जारी करने के आदेश दिए साथ में एक प्रश्न को डिलिट एवं एक प्रश्न के विकल्प को बदला एवं चार प्रश्नों पर कमेटी बैठाने का आरपीएससी को आदेश दिया। 

माननीय न्यायालय के निर्णय से पूर्व ही मैनें भी सरकार व आरपीएससी से मांग की थी कि आरएएस प्री के आधा दर्जन सवालों पर अभ्यर्थियों की आपत्ति पर आरपीएससी ने जो तर्क दिए हैं वे हास्यास्पद कम, चिंता का विषय अधिक है। आयोग कैसे उनींदे विषय विशेषज्ञों से प्रश्न बनवाता है, जिन्हें आधारभूत जानकारी तक नहीं है। RPSC को अपनी गलती मानें और अभ्यर्थियों के साथ न्याय करे।

आरपीएससी के विषय विशेषज्ञ कितने योग्य हैं इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि RAS-प्री में 6 प्रश्नों को डिलीट करना पड़ा और  अब आधा दर्जन से अधिक प्रश्नों पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। 

किन लोगों को प्रदेश के अधिकारियों के चयन का जिम्मा सौंप रखा है? यह मांग मैनें उस समय सरकार से की क्या उस समय सरकार ने ऐसे गैर जिम्मेदारान विषय विशेषज्ञों पर कोई कार्रवाई की जिन्होंने प्रदेश की बड़ी परीक्षा में 150 प्रश्न बनाने में भी इतनी भारी गलती की और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया। 

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समय आरपीएससी अघ्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री दिख रहे थे उन्होंने एक दिन पहले दिनांक 21.2.2022 को टिविट कर अपना बयान जारी कर कहा कि आरएएस मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग न्यायोचित नहीं है अर्थात उन्होंने धरना दे रहे अभ्यर्थियों की जायज मांगों को नजर अंदाज किया और साथ में माननीय न्यायालय के आदेश की प्रतिक्षा भी नहीं की। 

इतना ही नहीं उन्होंने माननीय न्यायालय के आदेश को भी धता बताकर दिनांक 22.2.2022 को माननीय न्यायालय के आदेश आरपीएससी के खिलाफ आने के बावजूद इसी दिन रात्रि 11.20 बजे ट्विट कर परीक्षा समय पर कराने की जिद्द जाहिर की। 

मुख्यमंत्री जी ने दिनांक 23.2.2022 को अपने पूरे सरकारी तंत्र को अभ्यर्थियों की जायज मांगों के खिलाफ लगाकर सिंगल बैंच के फैसले को खण्ड़ पीठ में चुनौति दी और अपनी जिद के चलते फैसला अपने अनुरूप ही आया।मैं मुख्यमंत्री जी पूछना चाहता हूँ की राज्य की कई भर्ती परीक्षाएं लंबित पड़ी है कुछ भर्तियों को तो  3 साल से भी ज्यादा समय हो गया परन्तु उनकी एग्जाम नही हो रही।

और भी कई भर्तियाँ है जो नियम या अन्य कमी के कारण लंबित पड़ी है मुख्यमंत्री जी ने कभी उनको समय पर कराने की जिद क्यों नही की? RAS भर्ती में अभ्यर्थियों की जायज मांग को भी दरकिनार कर क्यों आनन फानन में एग्जाम कराने की हठ की? क्या मुख्यमंत्री जी को अपने चहेतों को खुश करने की जिद में अभ्यर्थियों की समस्या भी नही दिखी?

आरपीएससी ने दिनांक 24.2.2022 को प्रेस नोट जारी कर मुख्य परीक्षा की नई तिथि 20,21 मार्च 2022 आनन—फानन में घोषित की। जैसे कि शिव सिंह राठौड़ की मंशा थी वैसे ही सरकार व आरपीएससी इस परीक्षा को लेकर निर्णय लिये जा रहे थे। 

पेपर लीक से जुड़े कुछ बिन्दु—

1. आरएएस मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्रों तैयार करने के समय ही शिव सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष बनना।

2. न्यायालय के निर्णय एवं अभ्यर्थियों के विरोध के बावजूद सरकार की जल्दी से जल्दी परीक्षा करवाने की हठधर्मिता।

3. अगर न्यायालय के निर्णय एवं अभ्यर्थियों की जायज मांग सरकार मानती तो परीक्षा कम से कम तीन महिने आगे होती जिससे शिव सिंह राठौड़ के चहतों की मंशा पूर्ण नहीं होती। 

4. शिव सिंह राठौड़ का कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में दिनांक 2.12.2021 को नियुक्ति हुई उसके बाद दिनांक 11.12.2021 को आरपीएससी अध्यक्ष शिव​ सिंह राठौड़ आरटीडीसी चैयरमैन धर्मेन्द्र राठौड़ जो मुख्यमंत्री के चहेते है उनके निवास पर जाकर उनके पुत्र ​गिरीश राठौड़ से मुलाकात की। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि कोई आरपीएससी अध्यक्ष मुख्यमंत्री और राज्यपाल को छोड़कर एक मुख्यमंत्री के चहेते नेता श्री धर्मेन्द्र राठौड़ के निवास पर गया ऐसे समय पर पर जब आरएएस भर्ती 2021 की प्रक्रिया चल रही थी। जिसमें मुख्य 
परीक्षा के इसी समय प्रश्न पत्र तैयार भी होने थे। 

5. पेपर लीक में शिव सिंह राठौड़ की इसमें भूमिका का महत्वपूर्ण तथ्य। शिव सिंह राठौड़ द्वारा दिनांक 18.12.2021 यानि आरपीएससी अध्यक्ष बनने के बाद जो ट्विट किया गया वह आरएएस मुख्य परीक्षा के प्रश्न पत्र दो के खण्ड़—स, भूगोल का 13वा प्रश्न है जो 10 अंक का है। 

इससे यह साबित होता है कि प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा आरएएस 2018 एवं आरएएस 2021 में सरकार के साथ मिलकर शिव सिंह राठौड ने बड़ा घोटाला किया है। मुख्यमंत्री जी में थोडी सी भी ईमानदारी है तो इसकी जांच के आदेश जारी करें। 

मुझे लगता है कि आप इसकी निष्पक्षा से जांच कराने की हिम्मत नहीं है क्योकि इसमें आपके चहेते धर्मेन्द्र राठौड़ प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और अन्य करीबी शामिल है। इसलिए मेरी सरकार से मांग है कि उक्त प्रकरण की सीबीआई जांच हो। यदि आपने इस महा घोटाले को छुपाने का काम किया जैसे रीट लीक में बडे मगरमच्छो को बचाया है तो हमारी सरकार आने के बाद योगी सरकार ने यूपीपीएससी में सीबीआई जांच करवाई है ऐसे ही हम इस महा घोटाले की सीबीआई से करवाऐगें।

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