दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन सवाई माधोपुर। यूनिसेफ और फ़्यूचर सोसाइटी की ओर से रणथंभौर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में आयोजित दो दिव...
सवाई माधोपुर। यूनिसेफ और फ़्यूचर सोसाइटी की ओर से रणथंभौर फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में आयोजित दो दिवसीय मीडिया कार्यशाला में किशोर स्वास्थ्य, एचपीवी टीकाकरण, डिजिटल साक्षरता और बदलती स्वास्थ्य पत्रकारिता की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने भाग लिया। उद्देश्य यह रखा गया कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी वैज्ञानिक तथ्यों के साथ सरल और विश्वसनीय रूप से जनता तक पहुँचे।
कार्यशाला की शुरुआत में डॉ. मनीषा चावला ने सर्वाइकल कैंसर की गंभीरता और उससे जुड़े चिंताजनक आंकड़ों को प्रस्तुत किया। यूनिसेफ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अंकुश सिंह ने मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सटीक जानकारी महिलाओं को इस बीमारी से बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।डिजिटल साक्षरता पर हुए सत्र में शोएब खान ने कहा कि इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन जानकारी को परखने की क्षमता अभी भी सीमित है। यूनिसेफ कंसलटेंट कुमार मनीष ने बताया कि एआई के दौर में ऑनलाइन उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी को तुरंत सच मान लेने का चलन बढ़ा है, ऐसे में तथ्य-जांच की जिम्मेदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों के लिए सुरक्षित डिजिटल हेल्थ टूल्स सुलभ कराए जाएं, ताकि उनकी डिजिटल समझ और रोजगार कौशल में सुधार हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया के पास अब जानकारी पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है, इसलिए पत्रकारों के लिए तथ्य-जांच कई गुना चुनौतीपूर्ण हो गई है।
भ्रम और मिथक को तोड़ना जरूरी:ज्ञान प्रकाश
ज्ञान प्रकाश ने कैंसर और एचपीवी टीकाकरण से संबंधित जागरूकता को आवश्यक बताते हुए कहा कि वैक्सीन को लेकर भ्रम और मिथक अभी भी बड़ी बाधा हैं। मीडिया का दायित्व है कि वैज्ञानिक तथ्यों को सही संदर्भ में जनता तक पहुँचाया जाए। फ़्यूचर सोसाइटी की सचिव डॉ. मीना शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम है और इस विषय पर जागरूकता अभियानों को गति देने की आवश्यकता है। सुरेन्द्र कुमार धलेटा ने यूनिसेफ के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि एईएफआई से जुड़ी ज्यादातर नकारात्मक खबरें सीमित स्रोतों पर आधारित थीं, जबकि वैज्ञानिक जानकारी को कम महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रिपोर्टिंग में अनेक स्रोतों से तथ्य जुटाना और विशेषज्ञों की राय शामिल करना अनिवार्य है।कार्यशाला में एचपीवी वैक्सीन की प्रासंगिकता, किशोर स्वास्थ्य चुनौतियों, डिजिटल गलत सूचना, एआई के दौर में तथ्य-जांच और विजुअल स्टोरीटेलिंग की अहमियत पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
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