जयपुर। डेंगू अब कभी-कभार होने वाली बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत में एक नियमित समस्या के रूप में उभर चुकी है, विश...
जयपुर। डेंगू अब कभी-कभार होने वाली बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत में एक नियमित समस्या के रूप में उभर चुकी है, विशेषकर मानसून और उसके बाद के समय में। डेंगू मच्छरों के काटने से फैलता है, विशेष रूप से एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के माध्यम से। शहरी क्षेत्र डेंगू के लिए अनुकूल होते हैं, क्योंकि ठहरा हुआ पानी और घनी आबादी इसके पनपने के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। भारत में हर वर्ष डेंगू के हजारों मामले सामने आते हैं। डेंगू का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि समय पर पहचान और उपचार न होने पर यह आसानी से गंभीर रूप ले सकता है।
डॉ. पंकज आनंद, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने डेंगू से बचाव के लिए प्रमुख जोखिम कारकों, प्रारंभिक पहचान, रोकथाम और उपचार उपायों पर प्रकाश डाला।
जोखिम कारक जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
- कूलर, गमलों, निर्माण स्थलों और खुले कंटेनरों में ठहरे हुए पानी की मौजूदगी
- कचरे का उचित निपटान न होना और जाम नालियाँ
- गर्म और आर्द्र (नमी वाला) मौसम
- शहरों में उच्च जनसंख्या घनत्व
- मच्छर-रोधी उपायों (जैसे रिपेलेंट या मच्छरदानी) का अभाव
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एडीज मच्छर दिन के समय भी काटता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर मुख्यतः रात में सक्रिय होते हैं।
लक्षणों की समय पर पहचान
- तेज बुखार
- गंभीर सिरदर्द और आँखों के पीछे दर्द
- जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द (‘ब्रेकबोन फीवर’)
- मतली, उल्टी और थकान
- त्वचा पर चकत्ते
इसके अलावा, उल्टी, पेट में दर्द, असामान्य रक्तस्राव और प्लेटलेट्स की कमी जैसे लक्षण संक्रमण की गंभीरता को दर्शाते हैं।
डेंगू की जांच कैसे की जाती है?
- एनएस1 एंटीजन टेस्ट (शुरुआती चरण में)
- IgM/IgG एंटीबॉडी टेस्ट (बाद के चरणों में)
- प्लेटलेट्स की निगरानी के लिए पूर्ण रक्त जाँच (CBC)
विशेष रूप से डेंगू के मौसम में लगातार तेज बुखार होने पर, लक्षण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय तुरंत जांच करवानी चाहिए।
उपचार और देखभाल
डेंगू के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय पर और सहायक उपचार से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। उपचार में सामान्यतः शामिल हैं:
- पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ (मौखिक या आवश्यकता अनुसार IV फ्लूड्स)
- डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं से बुखार का प्रबंधन
- प्लेटलेट्स और महत्वपूर्ण संकेतों (वाइटल्स) की नियमित निगरानी
- मध्यम से गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती
स्व-उपचार, विशेष रूप से इबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं का सेवन, हतोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि इससे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
रोकथाम: छोटे कदम, बड़ा प्रभाव
- घर में पानी जमा न होने दें
- पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करें
- पूरे बाजू के कपड़े पहनें और मच्छर-रोधी उत्पादों का उपयोग करें
- खिड़कियों पर जालियाँ लगवाएँ और आवश्यकता अनुसार मच्छरदानी का उपयोग करें
- सामुदायिक स्वच्छता अभियानों में भाग लें
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