नई दिल्ली, 29 मई 2026। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने देश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव संकट को...
नई दिल्ली, 29 मई 2026। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने देश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव संकट को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है। यह कार्रवाई 22 मई 2026 को द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित “48 Degree Heat 360 Degree Plan” शीर्षक समाचार रिपोर्ट के आधार पर की गई।
NGT ने कहा कि बढ़ता तापमान लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, जल उपलब्धता, उत्पादकता, वन्यजीवों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली सहित कई राज्यों में भीषण लू की स्थिति बनी हुई है।
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. अफरोज अहमद (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने टिप्पणी की कि हीटवेव भारत की सबसे कम पहचानी गई पर्यावरणीय आपदाओं में से एक बनती जा रही है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर रही है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि शहरों में कंक्रीट संरचनाएं, कम हरित क्षेत्र, वाहन प्रदूषण, औद्योगिक गतिविधियां और अत्यधिक ऊर्जा उपयोग तापमान बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक खुले में काम, सीमित शीतलन सुविधाएं और संस्थागत सहायता की कमी लोगों को अधिक प्रभावित कर रही है।
NGT ने निम्नलिखित उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया:
• क्षेत्रवार जलवायु अनुकूलन रणनीति,
• उच्च स्तरीय तापमान मैपिंग और रिमोट सेंसिंग,
• बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली,
• ओपन-एक्सेस जलवायु डेटा,
• स्कूल और समुदाय आधारित मौसम निगरानी,
• हीट रिस्क और पर्यावरणीय प्रभावों पर शोध।
ट्रिब्यूनल ने माना कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ता तापमान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा है।
मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) तथा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों को पक्षकार बनाया गया है।
सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पूर्व अपना जवाब और कार्ययोजना शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।
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