15 जुलाई। राष्ट्रीय प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी दिवस डॉ. संदीपन मुकुल, डायरेक्टर – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी ए...
डॉ. संदीपन मुकुल, डायरेक्टर – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी एवं डॉ. शानू अग्रवाल, कंसल्टेंट – प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर
सड़क दुर्घटना या किसी गंभीर हादसे के बाद जब मरीज की जान बच जाती है, तो अक्सर लोग मान लेते हैं कि खतरा टल गया। लेकिन असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है। कई बार हादसे में चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है, हाथ-पैर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उंगलियां कट जाती हैं।
ऐसी स्थिति में केवल जान बचाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मरीज को दोबारा सामान्य जीवन जीने योग्य बनाना भी उतना ही जरूरी होता है। यहीं पर प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आमतौर पर लोग प्लास्टिक सर्जरी को केवल सौंदर्य बढ़ाने वाली सर्जरी मानते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इसका सबसे बड़ा उद्देश्य दुर्घटना या बीमारी के बाद शरीर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की कार्यक्षमता और सामान्य स्वरूप को वापस लाना है।
दुर्घटनाओं में क्यों होती है इसकी जरूरत?
भारत में हर वर्ष लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिनके चेहरे, हाथ, पैर या शरीर के अन्य हिस्से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। कई मामलों में हड्डियां, मांसपेशियां, त्वचा, नसें और रक्त वाहिकाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं।
पहले ऐसे मामलों में अक्सर हाथ या पैर काटना ही एकमात्र विकल्प माना जाता था, लेकिन आधुनिक माइक्रोसर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव तकनीकों की मदद से आज कई मरीजों के अंग सुरक्षित रखे जा सकते हैं और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिलती है।
हालांकि चिकित्सा विज्ञान में हुई प्रगति के कारण अब ऐसे कई मरीजों के हाथ-पैर और चेहरे को पहले की तुलना में कहीं अधिक सफलतापूर्वक बचाया और पुनर्निर्मित किया जा सकता है।
किन परिस्थितियों में होती है प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत?
चेहरे का पुनर्निर्माण
गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में चेहरे की हड्डियां टूट सकती हैं, जबड़ा, नाक और आंखों के आसपास का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है। आधुनिक तकनीकों की मदद से इन हड्डियों को दोबारा सही स्थिति में स्थापित किया जाता है, जिससे मरीज का चेहरा पहले जैसा दिखने के साथ-साथ बोलने, खाने और देखने जैसी सामान्य क्रियाएं भी सुरक्षित रहती हैं।
हाथ-पैर बचाने का प्रयास
कई बार दुर्घटना में त्वचा और मांसपेशियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तथा हड्डियां खुल जाती हैं। यदि समय पर उपचार न मिले तो संक्रमण बढ़ने के कारण अंग काटने की नौबत आ सकती है। ऐसे मामलों में शरीर के किसी अन्य हिस्से से स्वस्थ त्वचा और ऊतक लेकर घायल स्थान पर लगाए जाते हैं, जिससे घाव भरता है और हाथ या पैर को बचाया जा सकता है।
हाथों की कार्यक्षमता वापस लाना
फैक्ट्री दुर्घटनाओं, मशीनों या कांच से कटने पर हाथ की नसें और टेंडन क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। समय रहते की गई माइक्रोसर्जरी से इन नसों और ऊतकों को दोबारा जोड़ा जा सकता है, जिससे मरीज भविष्य में हाथ का सामान्य उपयोग कर सके और अपने काम पर वापस लौट सके।
उपचार का उद्देश्य केवल घाव भरना नहीं
रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जाती कि घाव भर गया या नहीं। वास्तविक सफलता तब होती है जब मरीज दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होकर आत्मनिर्भर जीवन जी सके।
यदि किसी व्यक्ति का हाथ, पैर या चेहरा सफलतापूर्वक पुनर्निर्मित हो जाता है, तो उसका आत्मविश्वास लौटता है, मानसिक तनाव कम होता है और वह अपने परिवार एवं समाज के बीच सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो जाता है।
समय पर उपचार है सबसे महत्वपूर्ण
गंभीर चोटों में समय सबसे बड़ा निर्णायक होता है। यदि खुला घाव लंबे समय तक बिना उचित उपचार के रहता है, तो संक्रमण बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और अंग बचाने की संभावना कम हो सकती है।
इसीलिए दुर्घटना के बाद शुरुआती 24 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान ट्रॉमा विशेषज्ञ, ऑर्थोपेडिक सर्जन और प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन मिलकर उपचार करें तो बेहतर परिणाम मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
राष्ट्रीय प्लास्टिक सर्जरी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि प्लास्टिक सर्जरी केवल सौंदर्य बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह उन लोगों के लिए नई उम्मीद है, जिन्होंने किसी दुर्घटना में अपने शरीर का कोई हिस्सा या अपना आत्मविश्वास खो दिया हो। आधुनिक प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी ऐसे मरीजों को फिर से सामान्य, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है।
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