‘बुआ, बहन, बेटी स्नेह मिलन समारोह’ में पीहर लौटीं कई पीढ़ियों की बेटियां; मेघराज सिंह रॉयल ने शिक्षा, रोजगार और विकास के लिए एकज...
‘बुआ, बहन, बेटी स्नेह मिलन समारोह’ में पीहर लौटीं कई पीढ़ियों की बेटियां; मेघराज सिंह रॉयल ने शिक्षा, रोजगार और विकास के लिए एकजुट होने का किया आह्वान
रॉयल गांव (खण्डेला/सीकर)। खण्डेला क्षेत्र के रॉयल गांव में आयोजित ‘बुआ, बहन, बेटी स्नेह मिलन समारोह’ सामाजिक समरसता और बेटियों के सम्मान का अनूठा उदाहरण बना। समारोह में गांव के सभी जाति, समाज और वर्गों की करीब 500 बेटियां, बहनें और बुआएं शामिल हुईं। पीहर पहुंचने पर गांव और परिवार के लोगों ने उनका पारम्परिक स्वागत एवं बहुमान किया।
रॉयल गढ़ में आयोजित समारोह की जिम्मेदारी भामाशाह मेघराज सिंह रॉयल, उनके परिवार और ग्रामीणों ने संभाली। विवाह के बाद अलग-अलग स्थानों पर रह रहीं बेटियां वर्षों बाद अपने गांव लौटीं तो पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। बचपन की सखियों की मुलाकात हुई और कई पीढ़ियों के रिश्ते एक ही आंगन में जुटे।
कार्यक्रम में किसी एक जाति या परिवार के बजाय सर्व समाज की बेटियों को आमंत्रित किया गया था। गांव की बुआओं, बहनों, बेटियों और मातृशक्ति ने एक-दूसरे से संवाद किया तथा अपने बचपन और परिवार से जुड़ी यादें साझा कीं। नई पीढ़ी को भी परिवार के पुराने रिश्तों और ग्रामीण संस्कृति को समझने का अवसर मिला।
जातिवाद का जहर दूर करने की कोशिश: मेघराज सिंह
आयोजक मेघराज सिंह रॉयल ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों को उनके पीहर से जोड़ने के साथ जातिवाद का जहर दूर कर सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। गांव की प्रत्येक बेटी सम्मान की अधिकारी है, चाहे वह किसी भी जाति, समाज या वर्ग से आती हो।
उन्होंने कहा, “जातिवाद समुद्र का पानी है, मर्जी है उतना मीठा डाल लेना, वह कभी पीने लायक नहीं होगा।”
मेघराज सिंह ने ग्रामीणों से जातिवाद की राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, बेरोजगारी और विकास जैसे वास्तविक मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की ऊर्जा जातिगत विवादों में खर्च होने के बजाय बच्चों की अच्छी शिक्षा, युवाओं के रोजगार और गांव के विकास में लगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव केवल पैसे से नहीं लाया जा सकता। इसके लिए सेवा भावना, परिवार का सहयोग, पूरे गांव का आशीर्वाद और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कोई भी बड़ा सामाजिक कार्य तभी सफल होता है, जब गांव के सभी लोग उसे अपनी जिम्मेदारी मानकर साथ खड़े हों।
आधुनिक शिक्षा और हुनर पर देना होगा ध्यान
मेघराज सिंह रॉयल ने समारोह में बड़ी संख्या में पहुंचीं बेटियों, बहनों और मातृशक्ति की सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की उपस्थिति और आशीर्वाद ने कार्यक्रम को सार्थक बनाया है। ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए, ताकि गांव और समाज के लोग आपस में जुड़कर सामूहिक विकास के लिए प्रयास करते रहें।
आरक्षण और रोजगार के विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक और बदलती कार्यप्रणाली के कारण भविष्य में सरकारी नौकरियों की संख्या और स्वरूप में बदलाव आएगा। ऐसे में केवल सरकारी नौकरी या आरक्षण पर निर्भर रहने के बजाय बच्चों को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में तैयार करना आवश्यक है।
यूनाइटेडग्लोबल पीस फाउण्डेशन की ओर से करवाए जा रहे कामों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार हुनर उपलब्ध कराना होगा। बच्चों को ऐसी शिक्षा और प्रशिक्षण मिलना चाहिए, जिससे वे नौकरी तलाशने के साथ अपने लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार कर सकें।
सहयोग से सफल हुआ आयोजन
ब्रिगेडियर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि कोई भी बड़ा आयोजन केवल आर्थिक संसाधनों के आधार पर सफल नहीं हो सकता। इसके लिए सेवा भावना, परिवार का समर्पण, ग्रामीणों का सहयोग और गांव के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी होती है।
समारोह के दौरान बेटियों के सम्मान के साथ सामाजिक सहयोग, शिक्षा, रोजगार और गांव के विकास का संदेश दिया गया। करीब 500 बेटियों, बहनों और बुआओं की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि गांव की पहचान किसी एक जाति या वर्ग से नहीं, बल्कि उससे जुड़े सभी परिवारों से बनती है। सामाजिक समरसता, सेवा भावना और सामूहिक सहयोग के जरिए ही गांव तथा समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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